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*कुड़वार नाका ओवरब्रिज के नीचे अव्यवस्था जाम से जूझ रहे राहगीर*

*कुड़वार नाका ओवरब्रिज के नीचे अव्यवस्था जाम से जूझ रहे राहगीर**पैदल यात्रियों और वाहन चालकों की बढी परेशानी*सुल्तानपुर। कुड़वार नाका ओवरब्रिज के नीचे सड़क आम जनता के आने-जाने के लिए है लेकिन यहां एक…

*कुड़वार नाका ओवरब्रिज के नीचे अव्यवस्था जाम से जूझ रहे राहगीर*
*कुड़वार नाका ओवरब्रिज के नीचे अव्यवस्था जाम से जूझ रहे राहगीर*

*कुड़वार नाका ओवरब्रिज के नीचे अव्यवस्था जाम से जूझ रहे राहगीर*

*पैदल यात्रियों और वाहन चालकों की बढी परेशानी*

सुल्तानपुर। कुड़वार नाका ओवरब्रिज के नीचे सड़क आम जनता के आने-जाने के लिए है लेकिन यहां एक डॉक्टर साहब की क्लिनिक का बोर्ड देखकर ऐसा लगता है जैसे सड़क भी क्लिनिक की संपत्ति हो।

बोर्ड सिर्फ क्लिनिक की पहचान बताने तक सीमित नहीं है बल्कि क्लिनिक से कहीं ज्यादा बाहर तक फैलकर सड़क की जगह पर अपना इलाज कर रहा है। हालत यह है कि इस बोर्ड को बचाने के चक्कर में चौपहिया वाहनों को पर्याप्त दूरी बनाकर निकलना पड़ता है और वही कुछ फीट की दूरी आगे चलकर लंबे जाम का मर्ज बन जाती है।

दूसरी तरफ रेलवे स्टेशन से निकलने वाले पैदल यात्रियों के लिए यही रास्ता पहले सुगम था लेकिन अब अतिक्रमण और अव्यवस्था के कारण उनका रास्ता भी किसी परीक्षा से कम नहीं रह गया है।

ओवरब्रिज के नीचे पार्किंग की व्यवस्था है जिसका इस्तेमाल लोग करते हैं। लेकिन जब सड़क की जगह पर निजी क्लिनिक का बोर्ड और अन्य सामान फैल जाए तो पार्किंग भी सुविधा के बजाय नासूर बन जाती है। डॉक्टर साहब दूसरों की सेहत का इलाज करते हैं उम्मीद है कभी सड़क की बीमारी का भी इलाज कर देंगे। क्योंकि मरीजों को राहत देने वाली क्लिनिक के बाहर अगर जनता ही जाम, धूल और परेशानी की खुराक लेने लगे तो सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि जनता को डॉक्टर की क्लिनिक से इलाज चाहिए। सड़क पर उनके बोर्ड का दबाव नहीं।

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संपादकीय टीम

हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय मुहिम का संपादकीय डेस्क।

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