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सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की बौखलाहट के बाद फिर वायरल हुआ विक्रम मिस्री का बयान

भारत की तरफ से सिंधु जल संधि स्थगित किए जाने के खिलाफ पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हो गया है। पाकिस्तान ने 30 जून 2026 मंगलवार को इस्लामबाद में ‘सिंधु जल संधि : शांति और क्षेत्रीय स्थिरता …

सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की बौखलाहट के बाद फिर वायरल हुआ विक्रम मिस्री का बयान

भारत की तरफ से सिंधु जल संधि स्थगित किए जाने के खिलाफ पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हो गया है। पाकिस्तान ने 30 जून 2026 मंगलवार को इस्लामबाद में ‘सिंधु जल संधि : शांति और क्षेत्रीय स्थिरता का प्रमुख माध्यम’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इसहाक डार ने कहा कि उनका देश सिंधु जल संधि स्थगित करने के भारत के फैसले को खारिज करता है और यह अब भी वैध, बाध्यकारी और प्रभावी है।
चीखने चिल्लाने का कोई फायदा नहीं
हालांकि भारत पहले भी साफ कर चुका है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि से जुड़ा सहयोग, बैठकों और डेटा साझा करने की प्रक्रिया बहाल नहीं होगी। भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमला के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। 
विदेश सचिव विक्रम मिस्री का बयान वायरल
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इसहाक डार के बयान के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री का वो बयान फिर सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें उन्होंने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का एलान किया था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद 23 अप्रैल 2025 को विक्रम मिस्री ने घोषणा की थी, 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है, जब तक कि पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को अपना समर्थन विश्वसनीय और पक्के तौर पर छोड़ नहीं देता। इस वीडियो को सीनियर जर्नलिस्ट सिद्धांत सिब्बल ने X पर शेयर किया है। 
सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान ने कोई एक्शन नहीं लिया
भारत का कहना है कि सीमा-पार आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं पर पाकिस्तान ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है, जिसमें UNSC द्वारा वांछित आतंकवादियों का प्रत्यर्पण भी शामिल है इसलिए सिंधु जल संधि को बहाल नहीं किया जाएगा। चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना और सलाल बांध जलाशय से गाद निकालने की भारत की योजनाओं पर पाकिस्तान की तरफ से आपत्ति जताए जाने पर 5 जून 2026 को भी भारत ने दोहराया था कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर रोक नहीं लगाई जाती तब तक संधि जल संधि पर रोक जारी रहेगी। 
सिंधु जल संधि क्या है जिस पर चल रही तनातनी
सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर किए गए थे। सीमा-पार बहने वाली नदियों से जुड़े मुद्दों के समाधान और प्रबंधन के उद्देश्य से यह समझौता नौ वर्षों की लंबी वार्ताओं के बाद अस्तित्व में आया था।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने उठाए ये कदम
मगर पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था।
भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना विश्वसनीय और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी।
विदेश मंत्रालय ने पहले भी कहा था कि संधि के स्थगन की अवधि में भारत उस संधि के तहत अपने दायित्वों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है।
साथ ही किसी भी मध्यस्थता न्यायालय, विशेषकर भारत द्वारा अवैध माना जाने वाला न्यायाधिकरण, को भारत के संप्रभु निर्णयों की वैधता की समीक्षा करने का अधिकार नहीं है।
भारत ने पूर्व में जम्मू-कश्मीर में स्थित किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मामलों में भी तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय द्वारा दिए गए फैसलों को खारिज करते हुए कहा था कि यह पूरा तंत्र ही सिंधु जल संधि का उल्लंघन है।
भारत का आरोप है कि पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर जवाबदेही से बचने की कोशिश करता रहा है और यह तथाकथित मध्यस्थता प्रक्रिया भी उसी रणनीति का हिस्सा है। 

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संपादकीय टीम

हिन्दी दैनिक राष्ट्रीय मुहिम का संपादकीय डेस्क।

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